माँ पार्वतीआयुर्वेदिक

पंजीकरण सं. 14586 · आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा परिषद, बिहार

चार दशकों का अनुभव,शुद्ध जड़ी-बूटियों का इलाज

पथरी, बवासीर, साइटिका, हड्डी की टी.बी. और पुराने चर्म रोगों का आयुर्वेदिक उपचार। कैंसर के मरीज़ों और उनके परिवार के लिए सहायक देखभाल।

पहली बात-चीत निःशुल्क है। फ़ोन उठाने वाले वैद्य जी के परिवार से ही कोई होगा।

वैद्य रामनरेश सिंह

पंजीकरण सं. 14586 · नवादा, बिहार

मरीज़ों की बात

जो लोग यहाँ से ठीक होकर गए

रामेश्वर प्रसाद

रामेश्वर प्रसाद

पथरी · नवादा

पथरी का ऑपरेशन बताया गया था। घरवालों ने वैद्य जी के पास भेजा। तीन महीने दवा चली और पथरी निकल गई। अब कोई दर्द नहीं है। 

और भी मरीज़ों ने अपनी बात कही है

वीडियो, तस्वीरें और लिखे हुए अनुभव — सब एक जगह।

नीचे दिए अनुभव उदाहरण के तौर पर हैं। हर मरीज़ पर असर अलग-अलग होता है, और किसी परिणाम की गारंटी नहीं दी जा सकती।

14586
पंजीकरण संख्या
1951
अधिनियम के अंतर्गत
7
मुख्य रोग
100%
जड़ी-बूटी आधारित

सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला सवाल

कैंसर के मरीज़ों के लिए सहायक आयुर्वेदिक देखभाल

कैंसर का इलाज लंबा और थका देने वाला होता है। कीमो और रेडिएशन के दौरान शरीर टूटने लगता है — भूख मर जाती है, कमज़ोरी घेर लेती है, नींद नहीं आती। हमारा काम यहीं शुरू होता है।

  • भूख न लगना
  • कमज़ोरी और थकान
  • मुँह के छाले
  • जी मिचलाना और उल्टी
  • कब्ज़ या दस्त
  • नींद न आना, मन की बेचैनी
अपने कैंसर विशेषज्ञ का इलाज जारी रखिए। आयुर्वेद उसके साथ चलता है, उसकी जगह नहीं लेता।

परामर्श

अपनी तकलीफ़ यहीं लिख दीजिए

पूरा फ़ॉर्म भरने की ज़रूरत नहीं — नाम, नंबर और तकलीफ़ बता दीजिए। भेजते ही WhatsApp खुलेगा और संदेश पहले से लिखा मिलेगा।

  • पहली बात-चीत के पैसे नहीं लगते
  • फ़ोन वैद्य जी के परिवार से ही कोई उठाता है
  • आपकी जानकारी किसी और को नहीं दी जाती
या सीधे फ़ोन कीजिए9631249487

आपकी जानकारी सिर्फ़ आपके इलाज के लिए इस्तेमाल होती है। हम किसी और को नहीं देते।

इलाज का सफ़र

मरीज़ के आने से लेकर ठीक होने तक

यहाँ कोई नंबर लेकर लाइन में नहीं लगता। हर मरीज़ के साथ यह छह क़दम दोहराए जाते हैं — चाहे वह पहली बार आया हो या दसवीं बार।

  1. 1

    मरीज़ आते हैं

    दूर-दराज़ के गाँवों से, अक्सर थके हुए और थोड़ी-सी उम्मीद लेकर।

  2. 2

    पूरी बात सुनी जाती है

    तकलीफ़ कब से है, क्या-क्या आज़मा चुके हैं — बिना जल्दबाज़ी के।

  3. 3

    नाड़ी परीक्षण

    नाड़ी देखकर शरीर की अवस्था समझी जाती है, रिपोर्ट भी देखी जाती है।

  4. 4

    जड़ी-बूटी चुनी जाती है

    हर मरीज़ के लिए अलग — उम्र, अवस्था और ताक़त देखकर।

  5. 5

    दवा तैयार होती है

    छाँटना, सुखाना, कूटना — वैद्य जी अपने हाथों से करते हैं।

  6. 6

    साथ चलते हैं

    हर 15–20 दिन पर हाल पूछा जाता है, ज़रूरत हो तो दवा बदलती है।

क्यों यहाँ आएँ

जो बात हमें अलग करती है

  • पंजीकृत वैद्य

    बिहार की आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा परिषद में पंजीकरण संख्या 14586। प्रमाण-पत्र वेबसाइट पर मौजूद है।

  • दवा यहीं तैयार होती है

    जड़ी-बूटियाँ वैद्य जी ख़ुद तैयार करते हैं। हर मरीज़ की दवा उसकी अवस्था देखकर अलग बनती है।

  • पहले सुनना, फिर दवा

    पूरी बात सुने बिना दवा नहीं दी जाती। जल्दबाज़ी में किया इलाज टिकता नहीं।

  • साफ़ बात, छुपा हुआ खर्च नहीं

    खर्च मिलने पर ही पूरा बता दिया जाता है। बाद में कुछ जोड़ा नहीं जाता।

  • ना कहने से नहीं डरते

    अगर मामला हमारे हाथ का नहीं है, तो हम साफ़ मना कर देते हैं और डॉक्टर के पास भेजते हैं।

  • गाँव के लोगों के लिए सुलभ

    दूर से आने वालों के लिए फ़ॉलो-अप फ़ोन और WhatsApp पर हो जाता है, दवा भेज दी जाती है।

उपचार

किन रोगों में हम काम करते हैं

हर रोग का अपना पन्ना है — लक्षण, तरीक़ा और समय सब लिखा है।

अगर आप यह सोच रहे हैं

जो सवाल आपके मन में हैं

  • “सालों से दवा खा रहा हूँ, आराम आता है फिर लौट आता है।”

  • “ऑपरेशन बताया गया है, पर मन नहीं मान रहा।”

  • “डॉक्टर के पास वक़्त नहीं है पूरी बात सुनने का।”

  • “घरवाले कह रहे हैं आयुर्वेद देख लो, पर भरोसा किस पर करें?”

इनमें से कोई भी बात आपकी है, तो एक बार फ़ोन कीजिए। सुनने के पैसे नहीं लगते।

कैसे शुरू करें

चार आसान क़दम

  1. 1

    फ़ोन या WhatsApp कीजिए

    अपनी तकलीफ़ बताइए। पहली बात-चीत के पैसे नहीं लगते।

  2. 2

    जाँच और नाड़ी परीक्षण

    क्लिनिक आइए। पुरानी रिपोर्ट हों तो साथ लेते आइए।

  3. 3

    दवा तैयार होती है

    आपकी अवस्था के हिसाब से जड़ी-बूटी अलग से तैयार की जाती है।

  4. 4

    नियमित फ़ॉलो-अप

    हर 15–20 दिन पर हाल पूछा जाता है, ज़रूरत हो तो दवा बदली जाती है।

अपनी तकलीफ़ किसी को बताइए जो सुनता हो

पहली बात-चीत निःशुल्क है। फ़ोन कीजिए या WhatsApp पर लिखिए — जो आपको ठीक लगे।

फ़ोन WhatsApp बुक करें