सवाल-जवाब
जो अक्सर पूछा जाता है
अगर आपका सवाल यहाँ नहीं है, तो फ़ोन कीजिए। पूछने के पैसे नहीं लगते।
क्या आयुर्वेद से कैंसर ठीक हो जाता है?
नहीं, और जो ऐसा दावा करे उससे सावधान रहिए। हम कैंसर के मरीज़ों को सहायक देखभाल देते हैं — ताक़त, भूख, पाचन और इलाज के दौरान होने वाली तकलीफ़ों में राहत। अपने कैंसर विशेषज्ञ का इलाज हमेशा जारी रखिए।
क्या पथरी बिना ऑपरेशन निकल जाती है?
पथरी के आकार और जगह पर निर्भर करता है। छोटी और मध्यम पथरी में जड़ी-बूटियों से अच्छे नतीजे मिलते हैं। बहुत बड़ी पथरी में हम ख़ुद सर्जरी की सलाह देते हैं — बात-चीत में साफ़ बता देंगे।
दवा कितने दिन चलती है?
रोग और उसकी पुरानी अवस्था पर निर्भर करता है। आमतौर पर एक से तीन महीने। चर्म रोग और हड्डी की टी.बी. जैसे मामलों में इससे ज़्यादा भी लग सकता है।
क्या दवा का कोई नुक़सान है?
दवा जड़ी-बूटियों से बनती है और मात्रा देखकर दी जाती है। अगर आपकी कोई और दवा चल रही है — ख़ासकर शुगर, बी.पी. या टी.बी. की — तो शुरू में ही बता दीजिए। तभी सही सलाह मिल पाएगी।
क्या दूर से भी इलाज हो सकता है?
पहली बार आकर मिलना बेहतर होता है, क्योंकि नाड़ी देखे बिना पूरी बात समझ नहीं आती। उसके बाद फ़ॉलो-अप WhatsApp या फ़ोन पर हो जाता है और दवा भेज दी जाती है।
फ़ीस कितनी है?
पहली बात-चीत के पैसे नहीं लगते। दवा का खर्च रोग और अवधि पर निर्भर करता है — मिलने पर पूरी बात साफ़ बता दी जाती है, बाद में कुछ जोड़ा नहीं जाता।
क्या अंग्रेज़ी दवा के साथ आयुर्वेदिक दवा ले सकते हैं?
अक्सर हाँ, पर बताए बिना नहीं। कौन-सी दवा चल रही है यह जानने के बाद ही हम तय करते हैं कि क्या दिया जाए और कितने अंतर पर दिया जाए।
क्या महिला मरीज़ों के लिए अलग व्यवस्था है?
हाँ। महिला मरीज़ घर की किसी महिला सदस्य के साथ आ सकती हैं, और चाहें तो बात-चीत अलग से की जा सकती है।
अपनी तकलीफ़ किसी को बताइए जो सुनता हो
पहली बात-चीत निःशुल्क है। फ़ोन कीजिए या WhatsApp पर लिखिए — जो आपको ठीक लगे।