वैद्य जी के बारे में
वैद्य रामनरेश सिंह
जिन्हें इलाके में सब ‘बाँके बिहारी’ कहकर बुलाते हैं

नवादा ज़िले के एक छोटे से गाँव में बैठकर वैद्य रामनरेश सिंह ने चालीस साल से ज़्यादा वक़्त जड़ी-बूटियों के बीच बिताया है। उनकी पढ़ाई किसी बड़े शहर के कॉलेज में नहीं हुई — उन्होंने यह विद्या अपने बुज़ुर्गों से सीखी, और फिर बिहार की आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा परिषद से विधिवत पंजीकरण कराया।
आज भी दवा वही अपने हाथों से तैयार करते हैं। जड़ी-बूटियाँ छाँटना, सुखाना, कूटना — यह काम किसी और के भरोसे नहीं छोड़ा जाता। उनका कहना है कि दवा बनाते वक़्त मरीज़ का चेहरा सामने रहना चाहिए।
मरीज़ दूर-दराज़ के गाँवों से आते हैं — कोई पथरी लेकर, कोई सालों पुरानी बवासीर लेकर, और कोई कैंसर के इलाज के बीच थोड़ी राहत की उम्मीद लेकर। वैद्य जी सबसे पहले पूरी बात सुनते हैं, फिर दवा की बात करते हैं। और अगर मामला उनके हाथ का नहीं होता, तो वे साफ़ मना कर देते हैं — यह भी उनके काम का हिस्सा है।
“दवा से पहले मरीज़ का मन शांत होना ज़रूरी है। जल्दबाज़ी में किया इलाज कभी टिकता नहीं।”
प्रमाण
पंजीकरण प्रमाण-पत्र
हमारा पंजीकरण सार्वजनिक है — आप इसे परिषद से सत्यापित करा सकते हैं।
प्रमाण-पत्र बड़ा करके देखें- पंजीकरण संख्या
- 14586
- परिषद
- आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा परिषद, बिहार
- अधिनियम
- बिहार डेवलपमेंट ऑफ़ आयुर्वेदिक एंड यूनानी सिस्टम्स ऑफ़ मेडिसिन एक्ट, 1951
- पंजीकरण स्थान
- पटना, बिहार
- वैद्य
- श्री रामनरेश सिंह, पुत्र श्री भिखारी सिंह
पंजीकरण सं. 14586 · आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा परिषद, बिहार
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