रोग एवं उपचार
किन रोगों में हम काम करते हैं
हर रोग का अपना रास्ता होता है। नीचे हर तकलीफ़ के लिए अलग पन्ना है — उसमें लक्षण, हमारा तरीक़ा, कितना समय लगता है, और कब आपको डॉक्टर के पास जाना ही चाहिए, सब साफ़-साफ़ लिखा है।
हमारा तरीक़ा
हर रोग का रास्ता अलग होता है
कुछ तकलीफ़ें कुछ हफ़्तों में सँभल जाती हैं, कुछ में साल भर लगता है। किसी में जड़ी-बूटी अकेले काम करती है, किसी में बाहर से तेल और सिंकाई भी चाहिए, और कुछ में हमारा काम सिर्फ़ आपके डॉक्टर के इलाज के साथ चलना है। नीचे हर रोग के लिए अलग पन्ना है — उसमें लक्षण, हमारा तरीक़ा, कितना समय लगता है और कब आपको सीधे डॉक्टर के पास जाना चाहिए, सब साफ़ लिखा है।
कैंसर में सहायक देखभाल
चल रहे इलाज के साथ ताक़त, भूख और पाचन सँभालने के लिए आयुर्वेदिक सहायता।
पूरा पढ़िएसफ़ेद दाग (ल्यूकोडर्मा)
सफ़ेद दागों के लिए भीतर-बाहर दोनों तरफ़ से लंबा आयुर्वेदिक उपचार।
पूरा पढ़िएपथरी — किडनी एवं पित्ताशय
जड़ी-बूटियों से पथरी गलाने और मूत्रमार्ग से निकालने का उपचार।
बिना ऑपरेशनपूरा पढ़िएबवासीर
खूनी और बादी — दोनों तरह की बवासीर का सुरक्षित उपचार।
पूरा पढ़िएसाइटिका
कमर से एड़ी तक जाने वाले दर्द का जड़ी-बूटी और तेल आधारित उपचार।
पूरा पढ़िएहड्डी की टी.बी.
हड्डियों की तपेदिक में लंबे समय तक चलने वाला सहायक उपचार।
सहायक उपचारपूरा पढ़िएपुराना गैस्ट्रिक एवं अम्लता
वर्षों पुरानी गैस, जलन और अपच के लिए पाचन सुधारने वाला उपचार।
पूरा पढ़िएएक्जीमा एवं चर्म रोग
पुराने एक्जीमा, खुजली और दाद के लिए भीतर-बाहर दोनों का इलाज।
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एक नज़र में
किस रोग में कितना समय लगता है
यह अंदाज़ा है, वादा नहीं। हर शरीर अलग तरह से जवाब देता है, और पुरानी बीमारी में ज़्यादा समय लगता है।
| रोग | आमतौर पर |
|---|---|
| कैंसर — सहायक देखभालसहायक | इलाज के साथ-साथ |
| सफ़ेद दाग (ल्यूकोडर्मा) | 1–2 साल |
| पथरी — किडनी एवं पित्ताशयबिना ऑपरेशन | 1–3 महीने |
| बवासीर | 1–2 महीने |
| साइटिका | 2–4 महीने |
| हड्डी की टी.बी.सहायक उपचार | 6 महीने या अधिक |
| पुराना गैस्ट्रिक एवं अम्लता | 1–2 महीने |
| एक्जीमा एवं चर्म रोग | 2–4 महीने |
शुरू करने से पहले
पहली बार आने से पहले
- पुरानी जाँच रिपोर्ट साथ लाइए — अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, खून की जाँच
- अभी जो दवाएँ चल रही हैं, उनके डिब्बे या पर्ची साथ रखिए
- शुगर, बी.पी., थायरॉइड या टी.बी. की दवा चल रही हो तो ज़रूर बताइए
- बुज़ुर्ग मरीज़ के साथ घर का कोई सदस्य आए तो बेहतर
- आने से पहले एक बार फ़ोन कर लीजिए — भीड़ का अंदाज़ा मिल जाएगा
जो हम नहीं करते
- हम किसी को उनके डॉक्टर का इलाज छोड़ने को नहीं कहते
- जो मामला हमारे हाथ का नहीं, उसमें हम साफ़ मना कर देते हैं
- हम किसी रोग में ठीक होने की गारंटी नहीं देते
- खर्च पहले ही बता दिया जाता है, बाद में कुछ जोड़ा नहीं जाता
अपनी तकलीफ़ किसी को बताइए जो सुनता हो
पहली बात-चीत निःशुल्क है। फ़ोन कीजिए या WhatsApp पर लिखिए — जो आपको ठीक लगे।