माँ पार्वतीआयुर्वेदिक

रोग एवं उपचार

पुराना गैस्ट्रिक एवं अम्लता

गैस और अम्लता को लोग मामूली समझते हैं, इसलिए सालों तक दुकान से गोली लेकर काम चलाते रहते हैं। इससे तकलीफ़ दबती है, ठीक नहीं होती। आयुर्वेद में हम लक्षण नहीं, पाचन की आग — यानी अग्नि — को ठीक करने की कोशिश करते हैं। इसमें दवा जितनी ज़रूरी है, खाने का समय और तरीक़ा उतना ही ज़रूरी है।

आम लक्षण

  • छाती या पेट के ऊपरी हिस्से में जलन
  • खाने के बाद भारीपन और डकार
  • खट्टी डकार या मुँह में खट्टा पानी आना
  • पेट फूलना और गैस बनना
  • भूख कम लगना
  • सुबह जी मिचलाना

हमारा तरीक़ा

  • पाचन की अग्नि सुधारने वाली जड़ी-बूटियाँ
  • जलन और अम्लता को शांत करने वाली दवा
  • खाने का समय तय करना — यह सबसे ज़रूरी हिस्सा है
  • क्या छोड़ना है इसकी साफ़ सूची, बिना घुमा-फिराकर
  • आँतों की सफ़ाई और कब्ज़ का साथ-साथ इलाज

कितना समय लगता है

आमतौर पर एक से दो महीने। जलन में आराम पहले हफ़्ते-दो हफ़्ते में लगने लगता है, पर पाचन को पूरी तरह पटरी पर लाने में समय लगता है।

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